111 सालों से एक ही छत के
नीचे गूंज रही है गणपति बप्पा मोरया की गूंज,
रोहना कला के विश्वकर्मा परिवार ने कायम रखी अनोखी परंपरा
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया। छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत रोहना कला में आज भी एक ऐसी परंपरा जीवित है जो संयुक्त परिवार की मिसाल है। यहाँ विश्वकर्मा परिवार पिछले 111 वर्षों से लगातार गणेश उत्सव मना रहा है।
दादा से शुरू हुआ सिलसिला, पोते तक जारी
इस अटूट आस्था की नींव परिवार के बुजुर्ग स्व. श्री मल्लू विश्वकर्मा ने रखी थी। उन्होंने आज से 111 साल पहले अपने घर में पहली बार गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू की थी।
उनके बाद उनके पुत्र स्व. श्री मेहताब विश्वकर्मा ने इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ आगे बढ़ाया। अब तीसरी पीढ़ी में उनके सुपुत्र शरद विश्वकर्मा अपने पूरे परिवार के साथ इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
त्यौहार पर एक हो जाता है पूरा परिवार
इस परिवार की सबसे बड़ी खासियत इसकी एकता है। शरद विश्वकर्मा बताते हैं कि हम तीन भाई हैं और रोजगार के कारण तीनों अलग-अलग स्थानों पर अपने परिवार के साथ रहते हैं। लेकिन जैसे ही गणेश उत्सव आता है, हम तीनों भाई अपने बच्चों और परिवार के साथ पैतृक घर रोहना कला में एक साथ आ जाते हैं।
10 दिनों तक एक ही घर में, एक ही चूल्हे पर और एक साथ मिलकर हम श्री गणेश जी की सेवा, आरती और पूजा-पाठ करते हैं। पूरे गाँव में हमारा गणेश पंडाल आकर्षण का केंद्र होता है। अनंत चतुर्दशी पर बप्पा के विसर्जन के बाद ही हम सभी अपने-अपने कार्यस्थल पर लौटते हैं।
111 साल पुरानी यह परंपरा आज के दौर में जहाँ परिवार बिखर रहे हैं, वहाँ रोहना कला का विश्वकर्मा परिवार एकता और संस्कार की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।
हर खुशी हर गम में भी गणेश जी का साथ।
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा










