BREAKING: छिंदवाड़ा में खाकी का गुंडाराज – सिग्नल बंद, सड़क पर मौत का जाल और वसूली ही वसूली*
2. टारगेट के लिए जान से खिलवाड़: इंदिरा तिराहे पर यमराज बनी ट्रैफिक पुलिस, VIDEO वायरल होने पर भी अफसर मौन
3. क्राइम बेलगाम, पुलिस मालामाल: शहर में चोरी-लूट बढ़ी, खाकी नागपुर-सिवनी रोड पर कर रही अवैध वसूली
छिंदवाड़ा में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल: सुरक्षा छोड़ वसूली में मस्त, जानलेवा चेकिंग से जनता में आक्रोश
छिंदवाड़ा (दबंग इंडिया)। छिंदवाड़ा शहर में इन दिनों पुलिस का इकबाल नहीं, बल्कि खौफ और आक्रोश दोनों चर्चा में हैं। एक तरफ शहर में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ यातायात पुलिस का एक ही एजेंडा नजर आ रहा है – अवैध वसूली।
इंदिरा तिराहे पर मौत को दावत देती चेकिंग
शहर के सबसे व्यस्त इंदिरा तिराहे का एक वीडियो इन दिनों जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी चलती बाइक के सामने अचानक कूदकर उसे रोकते हुए दिख रहा है। यदि बाइक सवार संतुलन खो देता तो बड़ा हादसा तय था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई गलती नहीं, बल्कि रोज का तरीका है। चालान का टारगेट पूरा करने के लिए पुलिसकर्मी अपनी और जनता की जान दांव पर लगा रहे हैं। अचानक की जा रही इस चेकिंग से आए दिन गाड़ियां स्लिप हो रही हैं और लोग घायल हो रहे हैं।
मानसरोवर कॉम्प्लेक्स पर फिल्मी दौड़
ऐसी ही एक और घटना मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के पास रात में हुई। तीन युवक मोटरसाइकिल से अपने घर जा रहे थे, तभी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीछे से दौड़ाकर पकड़ने की कोशिश की। सवाल यह है कि रात के अंधेरे में इस तरह दौड़ाने से यदि युवक गिर जाते या कोई हादसा हो जाता, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? क्या वर्दी को इस तरह की गुंडागर्दी का अधिकार है?
सिग्नल बंद, वसूली चालू – ये कैसा सिस्टम?
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की पोल खोलने के लिए इतना ही काफी है कि शहर के अधिकांश ट्रैफिक सिग्नल महीनों से बंद पड़े हैं। चौराहों पर जाम लगता है, लोग परेशान होते हैं, लेकिन इसे सुधारने के बजाय पुलिस नागपुर रोड, सिवनी रोड और परासिया रोड पर खड़े होकर सिर्फ चालान काटने और वसूली करने में व्यस्त है।
क्राइम पर अंकुश नहीं, सिर्फ चालान पर फोकस
शहरवासियों का सीधा आरोप है कि पुलिस अपराध रोकने में पूरी तरह फेल हो चुकी है। चोरी, लूट और नशाखोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन देहात से लेकर कोतवाली तक पुलिस सिर्फ यातायात वसूली अभियान में लगी है। जब आधुनिक समय में ई-चालान, सीसीटीवी और स्पीड गन मौजूद हैं, तो जान जोखिम में डालकर ये पुराना और खतरनाक तरीका क्यों अपनाया जा रहा है?
जनता अब पूछ रही है कि आला अधिकारी इस वायरल वीडियो के बाद भी कब तक आंखें बंद रखेंगे? क्या पुलिस किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रही है?
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा








