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छिंदवाड़ा जनपद पंचायत अधिकारी की 10 वर्षों में ‘अकूत’ कमाई: करोड़ों की प्रॉपर्टी और भोपाल तक मजबूत ‘सेटिंग’

छिंदवाड़ा जनपद पंचायत अधिकारी की 10 वर्षों में ‘अकूत’ कमाई: करोड़ों की प्रॉपर्टी और भोपाल तक मजबूत ‘सेटिंग’

चौरई, अमरवाड़ा से लेकर परासिया तक शिकायतों का अंबार, फिर भी कार्रवाई से बच रहा साहब

छिंदवाड़ा (दबंग इंडिया ब्यूरो)। छिंदवाड़ा जिले के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक जनपद पंचायत अधिकारी की अकूत संपत्ति और उनके ‘रसूख’ की चर्चा जोरों पर है। महज 10 वर्ष पहले दूसरे जिले से ट्रांसफर होकर छिंदवाड़ा आए इस अधिकारी ने एक दशक के भीतर करोड़ों रुपए की बेनामी और नामी संपत्ति खड़ी कर ली है। हैरान करने वाली बात यह है कि हर पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के बावजूद साहब पर अब तक कोई आंच नहीं आई है।

10 साल में बनाई करोड़ों की प्रॉपर्टी, सचिव संगठन के ज्ञापन के बाद भी जिला प्रशासन मौन।

जहाँ-जहाँ रहे, वहाँ लगे भ्रष्टाचार के आरोप*
यह अधिकारी छिंदवाड़ा जिले की कई महत्वपूर्ण जनपद पंचायतों (जैसे चौरई, अमरवाड़ा और परासिया) में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में भी जनपद पंचायत में पदस्थ हैं। सूत्रों के अनुसार, जिस भी जनपद पंचायत में इस अधिकारी की तैनाती रही, वहाँ इनके खिलाफ भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले दर्ज हुए, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख के चलते मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए गए।

करोड़ों का साम्राज्य: आलीशान मकान और जमीनें

अधिकारी की संपत्ति का ब्यौरा चौंकाने वाला है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार:

  • छिंदवाड़ा-अमरवाड़ा मार्ग: वीइस मुख्य मार्ग पर अधिकारी की करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन और प्रॉपर्टी बताई जा रही है।
  • शहर के नजदीक आलीशान मकान: छिंदवाड़ा शहर से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर अधिकारी के दो आलीशान मकान हैं, जिनकी कीमत लाखों-करोड़ों में आंकी जा रही है।

ठेकेदारों से वसूली और कमीशन का खेल
शिकायतों के मुताबिक, जनपद पंचायत के तहत आने वाली ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में अधिकारी के सह पर बड़ी वसूली की जाती है। ठेकेदारों और पंचायतों से सीधे तौर पर कमीशन का नेटवर्क चलाया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि एक अधिकारी का ट्रांसफर कुछ महीने पहले हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में उनका प्रभाव और दखल आज भी जस का तस बना हुआ है।

प्रशासनिक मौन पर उठ रहे सवाल
कुछ महीनों पहले ग्राम पंचायत के सचिव संगठन ने एकजुट होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर इस अधिकारी के खिलाफ एक शिकायती ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में भ्रष्टाचार के ठोस आरोप लगाए गए थे, लेकिन इतने महीने बीत जाने के बाद भी आज तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासनिक मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

भोपाल तक ‘सेटिंग’ का असर!*
आखिर इतनी शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं होती? इसका जवाब अधिकारी के रसूख में छिपा है। चर्चा है कि साहब का छिंदवाड़ा से भोपाल तक लगातार दौरा लगा रहता है। राजधानी में बैठे ऊंचे रसूखदारों से अधिकारी की मजबूत ‘सेटिंग’ है। इसी वीआईपी नेटवर्किंग के कारण स्थानीय स्तर पर होने वाली तमाम शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाती हैं। अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले पर वरिष्ठ अधिकारी और शासन क्या संज्ञान लेता है।

कल देखी भाग दो कौन है वह है अधिकारी

दबंग इंडिया छिंदवाड़ा कन्हैया विश्वकर्मा
7566756778