ट्राइबल विभाग में अंगद राज: 20 साल से एक ही कुर्सी पर जमे बाबू, सरकार बदल गई पर सिस्टम नहीं बदला
कलेक्टर बदले, नेता बदले, पर नहीं हिले ट्राइबल के ‘स्थायी’ अधिकारी, नेताओं के संरक्षण में चल रहा वसूली का खेल
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया । छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश में भले ही हर 5 साल में सरकार बदल जाती हो, विधायक, सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक बदल जाते हों, लेकिन छिंदवाड़ा के आदिवासी विकास विभाग में एक अलग ही संविधान चलता है। यहां के अधिकारी-कर्मचारी अंगद की तरह पैर जमाकर पिछले 15 से 20 सालों से एक ही कुर्सी पर कुंडली मारे बैठे हैं।
क्यों नहीं होता ट्रांसफर? सबसे बड़ा सवाल –
जिले में कई कलेक्टर आए और चले गए, कई जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन ट्राइबल विभाग के वही चेहरे आज भी उसी टेबल पर बैठे फाइलें निपटा रहे हैं। लगातार शिकायतों के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कारण साफ है – विभागीय सूत्रों के मुताबिक इन बाबुओं को बड़े नेताओं का खुला आशीर्वाद प्राप्त है।
भ्रष्टाचार का अड्डा बना ट्राइबल ऑफिस –
सूत्रों की मानें तो विभाग में हर काम का रेट फिक्स है। छात्रवृत्ति से लेकर निर्माण कार्य, हर फाइल में पैसे लेने के आरोप लगते रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन पर सबसे ज्यादा शिकायतें इसी विभाग की हैं। जनविश्वास शिविर में भी वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्राइबल विभाग के कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई थी, लेकिन आदत पुरानी है।
जनता पूछ रही है – जब एक ही आदमी 20 साल तक एक ही कुर्सी पर रहेगा तो भ्रष्टाचार क्यों नहीं बढ़ेगा? अगर सरकार ने जल्द ट्रांसफर नीति लागू नहीं की तो यह विभाग यूं ही वसूली का अड्डा बना रहेगा। विभाग में जल्द एक और बड़ी कार्रवाई की आहट है।
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा








