छिंदवाड़ा किसान कांग्रेस संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम सोपे ज्ञापन
11 सूत्री मांगों को लेकर कलेक्ट कार्यालय पहुंचे किसान कांग्रेस संगठन
ने सोपे ज्ञापन
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा
विशेष मांगों को लेकर यहां है मांग
किसानों की विभिन्न समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण करवाने हेतु
सेवा सहकारी समितियों से किसानों के के.सी.सी. लोन ० प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च तय की गई है उसे एक माह बढ़ाकर 30 अप्रैल तक किया जाना चाहिये। वर्तमान में किसानों की गेहूँ फसल की कटाई चल रही है, और जिले में 7 अप्रैल 2026 से गेहूँ उपार्जन केन्द्रों में खरीदी की जायेगी। किसानों की फसल बिक नहीं पायी है इस कारण उन्हे ऋण जमा करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण तारीख बढ़ायी जाये ।
किसानों की गेहूँ और चने की फसल में लागत मॅहगाई के कारण अधिक ल रही है, ऐसे में सरकार द्वारा कम मूल्य पर किसानों की फसल खरीदी जा रही है जैसे बढ़ाकर 4000 हजार रूपये प्रति क्विंटल गेहूँ एवं 8000 रूपये प्रति क्विंटल चने के भाव सरकार दे और उस पर इन फसलों की खरीदी करे ।
किसान विरोधी भारत अमेरिका करार समझौते को तुरंत वापस लिया जाये विशेषकर इसमें किसानों और कषि से संबंधित सभी शर्ते तत्काल प्रभाव से वापस हो ।
भारत के किसानों की फसल उक्त समझौते के कारण कम दामों में बिक रही है। सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों को अपनी मक्का 1200 से 1500 रूपये प्रति क्विंटल बेचने पर मजबूर होना पड़ा और किसानों को 1000 रूपये प्रति क्क्टिल का नुकसान झेलना पड़ा और किसानों को 2400 रूपये प्रति क्विंटल का भाव नहीं मिल पाया ।
जिले की कृषि उपज मण्डी कुसमेली में भारी अव्यवस्थाओं का आलम है उसमें तुरंत सुधार किया जाये, किसानों को अपनी उपज रखने शेडों में जगह नहीं मिल पाती और शेडों में व्यापारियों का अनाज भरा रहता है, इससे किसानों को खुले में अनाज रखना पड़ता है। किसानों के लिये ग्रीष्म ऋतु को देखते हुये पीने का पानी और छाया की व्यवस्था भी मण्डी में नहीं है, जिसे तुरत किया जाये । मण्डी क्षेत्र में पार्किंग का भी अभाव है और सड़कों पर धूल उड़ रही है इससे किसानों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और वे बीमार हो रहे हैं एवं आवागमन में असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
कलेक्टर स्वयं मण्डी का निरीक्षण करें तो उन्हे मण्डी का निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार करवाना चाहिये ।
किसानों के कृषि पंप कनेक्शनों के बकाया बिजली बिल माफ किये जायें और किसानों के पंप कनेक्शन नहीं काटे जायें और यदि बिल माफ नहीं किया जाता तो उसे बिल जमा करने की तिथि मार्च की वजाय 30 अप्रैल की जाये ।
क्योंकि वर्तमान में किसानों की फसल की कटाई चल रही है और बिकी करने के बाद ही किसान बिजली बिल का भुगतान कर पायेंगे ।
. जिले में गत दिवस अनेकों स्थानों पर बेमौसम आधी तूफान, ओला वृष्टि से किसानों की गेहूँ की फसल को नुकसान हुआ है विशेषकर तामिया, छिन्दी, धनौरा, बटकाखापा, अमरवाड़ा, परासिया सहित अन्य क्षेत्रों में नुकसानी की जानकारी।
प्राप्त हई है. इन क्षेत्रों की नुकसानी का सर्वे करवाया जाये और किसानों को मुआवजा और फसल बीमा क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाये ।
जिले में नरवाई जलाने पर जो प्रतिबंध लगाया गया है उस नियम को शिथिल किया जाये और प्रशासन स्वयं नरवाई से पशु चारा बनाने की व्यवस्था करें लघु सीमांत और मध्यम किसानों को प्रशासन पशु चारा बनाने की मशीन निः शुल्क उपलब्ध कराये।
सेटेलाईट से किसानों की नरवाई जलने पर प्रकरण बनाये जाते हैं लेकिन फसल नुकसानी पर बीमा कंपनियों को सेटेलाईट से किसानों की नुकसानी दिखाई नहीं देती। इसी प्रकार भारी, कारखानों और उद्योगों से जो प्रदूषण होता है उस पर कार्यवाही न कर केवल किसानों पर प्रकरण बनाया जाता है।
अमेरिका ईरान युद्ध के कारण किसानों के कृषि उपकरण विशेषकर स्प्रिंकलर, ड्रिप लगाने के पाईप मँहगे हो गये हैं, उस पर सरकार नियंत्रण लगाये और किसानों के हित प्रभावित होने से बचाये और गैस सिलेण्डर की समस्या को देखते हुये गोबर गैस संयंत्र किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान पर बनाकर दिये जायें ।
जिले में सिंचाई जलाशयों में समय से पहले सिंचाई के लिये पानी देना बंद कर दिया गया है, उसकी जांच की जाये और किसानों की फसल एक पानी से सिंचाई के अभाव में खराब हुई इसकी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की तय की जाये और सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये ।
किसानों की गेहूँ फसल आवक और ग्रीष्म ऋतु को देखते हुये गेहूँ के खेतों में आगजनी की घटनायें बढ़ गई हैं उस पर नियंत्रण किया जाये ।
शाट सर्किट इत्यादि से आग लगने पर किसानों को मुआवजा नहीं दिया जाता और आगजनी की घटनाओं में रिस्क कवर नहीं की जाती उसे कवर किया जाना चाहिये किसानों की नुकसानी की भरपाई हो सके।
. शहरी क्षेत्र के किसानों के कृषि पंप कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं ।
. इस कारण उन्हे प्रतिमाह बिल देना पड़ेगा, इस पर रोक लगायी जावे और स्मार्ट लग गये हैं उन्हे बदलकर सामान्य मीटर किये जाये और शहरी क्षेत्र के किसानों से भेदभाव न कर उन्हें भी फ्लड रेट का ही बिल दिया जाये ।
प्रतिलिपि :-
कलेक्टर जिला छिंदवाड़ा को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित।
चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह, जय सक्सेना
अर्जुन वानखेड़े ,दतियम पाल
बड़ी संख्या में किसान कांग्रेस संगठन के पदाधिकारी एवं किसान उपस्थित थे ।
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा










