दास्तां खुशियों की
आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं उमा सोनी
कृषि विज्ञान केंद्र छिंदवाड़ा के प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से शुरू किया पापड़ उद्योग
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया/ छिंदवाड़ा आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय महिला कृषक कल्याण वर्ष के अवसर पर छिंदवाड़ा जिले के इमलीखेड़ा की उमा सोनी महिला आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं। कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव द्वारा दिए गए तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से उन्होंने “उमा श्री पापड़ उद्योग” की स्थापना कर न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव के भ्रमण पर पहुंचे संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. टी. आर. शर्मा ने इमलीखेड़ा स्थित उमा पापड़ उद्योग का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने उमा सोनी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के खाद्य प्रसंस्करण वैज्ञानिक डॉ. डी.सी. उमा सोनी ने केंद्र से खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसके बाद उन्होंने पापड़ निर्माण का कार्य प्रारंभ किया।
केंद्र द्वारा उन्हें उत्पादन, गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।
आज उमा सोनी का पापड़ उद्योग सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और वे अपनी मेहनत से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उनका यह प्रयास न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
भ्रमण के दौरान संचालक डॉ. टी. आर. शर्मा ने उमा सोनी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके प्रयासों को महिला सशक्तिकरण की एक उत्कृष्ट मिसाल बताया।
इस अवसर पर केंद्रीय नींबू वर्गीय अनुसंधान केंद्र नागपुर के निदेशक डॉ. दिलीप कुमार घोष, कृषि विज्ञान केंद्र देलखारी के प्रमुख डॉ. आर. एल. राउत, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर. के. झाड़े सहित अन्य वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान लगातार जारी है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दबंग इंडिया परिवार की ओर से हार्दिक बधाई शुभकामनाएं।
महिला दिवस पर विशेष :
होम स्टे में महिलाओं ने मारी बाजी…गांवों में दिखता है रिश्तों का संगम और शानदार मेहमान नवाजी
महिला दिवस विशेष: पर्यटकों के स्वागत से विदाई तक सब कुछ महिलाओं के हाथों में
सास-बहू, माँ-बेटी, देवरानी-जेठानी मिलकर चला रहीं होम स्टे
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया/ छिंदवाड़ा/ मनेशी धुर्वे और अलका धुर्वे…छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्राम धूसावानी में रहने वाली यह महिलाएं रिश्ते में तो सास-बहू हैं लेकिन जब पर्यटक होम स्टे में आते हैं तो दोनों मिलकर मेहमान नवाजी में जुट जाती हैं।
कुछ ऐसा ही होता है सावरवानी में, जहां मालती यदुवंशी अपनी सास शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम स्टे चला रहीं हैं। छिंदवाड़ा जिले के सभी पर्यटन ग्रामों की महिलाएं अब होम स्टे व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
आय के साथ मिली पहचान
ये होमस्टे न केवल उन्हें आय का साधन दे रहे हैं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी दुनिया के सामने ला रहे हैं। परंपरा और पर्यटन का यह संगम महिलाओं के जीवन को नई दिशा दे रहा है। खास बात यह है कि छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में पर्यटकों के बीच सास-बहू और मां-बेटी मिलकर काम करते हैं, जो मिसाल के तौर पर देखा जाता है।
जिले के हर होम स्टे के संचालन में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है।
जिले में 50 होम स्टे संचालित –
मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा होम स्टे वाले जिले छिंदवाड़ा में इस वक्त 50 से अधिक होम स्टे संचालित हैं।
सारे होम स्टे महिलाओं के नाम पर ही रजिस्टर्ड किए गए हैं। इन होम स्टे में अधिकांश काम महिलाएं ही संभालती हैं।
छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्राम सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी में स्थानीय महिलाएं न केवल अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से अपनी पहचान बना रही हैं।
हाथों से बनाती स्वादिष्ट भोजन –
ग्राम की महिलाएं अब पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय भोजन तैयार कर रही हैं।
इसके साथ ही वे लोक नृत्य और लोक गायन के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं। इससे न केवल पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है, बल्कि महिलाओं को भी सम्मानजनक आय का साधन प्राप्त हो रहा है।
सारी कमान महिलाओं के हाथों में
विशेष बात यह है कि गांव की कई महिलाएं स्वयं होमस्टे का संचालन कर रही हैं और पर्यटकों के स्वागत, भोजन व्यवस्था तथा सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रबंधन कर रही हैं।
पर्यटकों की विदाई तक वे सारा काम अपने जिम्मे संभाले हुए हैं। इससे वे आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि होमस्टे की इस पहल से गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ ही सभी पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।
दबंग इंडिया परिवार की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
महिला दिवस पर विशेष: कृषि सखी की सफलता की कहानी
कृषक कल्याण वर्ष 2026 में प्राकृतिक खेती से छिंदवाड़ा की महिला किसान कमा रही हैं लाखों का मुनाफा
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया/ छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहनाकला की प्रगतिशील महिला किसान पूजा माहौरे आज प्राकृतिक खेती के माध्यम से न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
पति तरुण माहौरे के साथ मिलकर उन्होंने खेती को एक नए स्वरूप में विकसित किया है।
पूजा माहौरे के पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है।
पहले वे परंपरागत तरीके से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर खेती करती थीं। समय के साथ खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी और रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति कम होने लगी थी। मिट्टी कठोर होती जा रही थी और स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इस चिंता ने उन्हें खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में प्रेरित किया।
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ाया कदम –
कुछ माह पहले उन्हें कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत कृषि सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती के विभिन्न अवयवों और तकनीकों को सीखा।
उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, निर्मास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक घोल बनाना सीखा और अपने खेत में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से इन्हें तैयार कर उपयोग करना शुरू किया।
आज वे अपने 1 एकड़ क्षेत्र में सब्जियों की प्राकृतिक खेती कर रही हैं और पूरी तरह रसायन मुक्त सब्जियां उत्पादन कर रही हैं।
हाट बाजार से बढ़ी आय –
प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियों की मांग बाजार में अधिक होने लगी।
पूजा माहौरे अपनी सब्जियों को प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में बेचती हैं, जहां उन्हें अच्छे दाम मिलते हैं।
उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि खेती से हर सप्ताह नियमित आय होगी, लेकिन प्राकृतिक खेती के कारण उनकी आमदनी पहले से दो गुना से भी अधिक हो गई है।
देसी गाय पालन से अतिरिक्त आय –
आत्मा परियोजना के प्रशिक्षण से प्रेरित होकर उन्होंने देसी गिर और साहीवाल नस्ल की कुल 10 गायों का पालन शुरू किया। इन गायों का दूध शहर में बेचकर भी वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
मासिक आय –
प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में सब्जियों की बिक्री से unhe लगभग ₹10,000 प्रतिमाह शुद्ध लाभ और देसी गाय के दूध की बिक्री से लगभग ₹30,000 प्रतिमाह शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार पूजा माहौरे प्राकृतिक खेती और पशुपालन के माध्यम से लगभग ₹40,000 प्रतिमाह की अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं।
विशेष उपलब्धि
महिला किसान पूजा माहौरे के इस नवाचार और मेहनत की सराहना कृषि विभाग, आत्मा परियोजना और पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा की जा रही है। हाल ही में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय मिलेट मेले में उन्होंने प्राकृतिक और जैविक सब्जियों की दुकान लगाई, जहां उन्हें अच्छा मुनाफा मिला।
इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें संयुक्त संचालक कृषि एवं जिले के उपसंचालक कृषि द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
अन्य किसानों के लिए बनी प्रेरणा
पूजा माहौरे की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान प्राकृतिक खेती और पशुपालन को अपनाएं तो कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। आज वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों और महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
कृषक कल्याण वर्ष 2026 और महिला दिवस के अवसर पर पूजा माहौरे जैसी कृषि सखियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
दबंग इंडिया परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं ।
डॉ. रश्मि नेमा को “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” पर आयुर्वेद गुरु पुरस्कार
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भारती कुमार मंगलम ने किया सम्मानित
छिंदवाड़ा। दबंग इंडिया छिंदवाड़ा कन्हैया विश्वकर्मा
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयुर्वेद फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में छिंदवाड़ा की आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि नेमा को “आयुर्वेद गुरु पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भारती कुमार मंगलम के कर-कमलों से प्रदान किया गया।
डॉ. नेमा ने छिंदवाड़ा एवं जयपुर में अब तक 104 निःसंतान दंपत्तियों का सफल उपचार कर सरकार के “सुप्रजा अभियान” को नई दिशा और गति प्रदान की है।
साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्त्री एवं प्रसूति विभाग में एक महत्वपूर्ण शोध पत्र भी प्रस्तुत किया, जिसे उल्लेखनीय माना जा रहा है।
इस उपलब्धि पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, आयुष विभाग के प्रतिनिधियों तथा चिकित्सा समुदाय ने उन्हें बधाई दी।
इस अवसर पर डॉ. रश्मि नेमा ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि जनकल्याण की जीवनशैली है, जिसे राष्ट्रीय अभियानों से जोड़कर देश को रोगमुक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
दबंग इंडिया परिवार की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
कन्हैया विश्वकर्मा
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