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छिंदवाड़ा में लोककला को समर्पित गणेश पंडाल, चावल के आटे से बनी रंगोली बनी आकर्षण

. ऐपण-अल्पना से सजा बप्पा का दरबार, बाल स्वरूप में लुभा रहे गणपति
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छिंदवाड़ा में लोककला को समर्पित गणेश पंडाल, चावल के आटे से बनी रंगोली बनी आकर्षण

. पारंपरिक लोक कला से जीवंत हुआ गणेश पंडाल

छिंदवाड़ा दबंग इंडिया। छिंदवाड़ा गणेश उत्सव पर शहर में भक्ति के साथ-साथ लोक संस्कृति की भी झलक देखने को मिल रही है।
पुराना छापा खाना, राजश्री प्रिंटर्स के पास साईनाथ मंडल द्वारा स्थापित गणेश पंडाल को इस बार उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण और बंगाल की अल्पना लोककला से सजाया गया है।

इस विशेष पंडाल में भगवान गणेश बाल अवस्था में विराजमान हैं, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

आयोजकों ने बताया कि पंडाल सज्जा में पूरी तरह से पारंपरिक लोक कला का उपयोग किया गया है। ऐपण और अल्पना मूल रूप से धार्मिक अनुष्ठान और पूजा स्थलों को सजाने के लिए बनाई जाने वाली रंगोली अलंकरण कला है।

इस कला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सात्विकता है।

परंपरागत रूप से इसे बनाने के लिए चावल के आटे और पानी से घोल तैयार कर गेरू से लिपी हुई धरती पर उकेरा जाता है, ताकि पूजा के बाद यह छोटे जीव-जंतुओं और पक्षियों के लिए भोजन बन सके।

हालांकि आधुनिक समय में कलाकार इसमें स्थायी रंगों का भी प्रयोग करने लगे हैं।

पंडाल की डिजाइन में वृत्ताकार ज्यामितीय आकृतियों, शैलीगत फूल-पत्तियों और लहरदार रेखाओं का अत्यंत बारीक और जटिल संयोजन किया गया है, जो देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

मंडल के सदस्यों का कहना है कि इस सज्जा के पीछे उद्देश्य केवल सुंदरता नहीं, बल्कि लुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं को जीवित रखना और नई पीढ़ी को इससे परिचित कराना है।

दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँच रहे हैं और इस अनोखे पंडाल की सराहना कर रहे हैं।

स्थान – पुराना छापा खाना, राजश्री प्रिंटर्स, साईनाथ मंडल के पास, छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा