छिंदवाड़ा में सचिव संगठन ने सौंपा 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया। छिंदवाड़ा मे आज मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन के पदाधिकारियों ने 17 बिंदुओं का ज्ञापन सौंपा।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुई तो प्रदेश भर के सचिव हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
ज्ञापन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत जिला छिंदवाड़ा के माध्यम से दिया गया।
संगठन ने कहा कि पंचायत सचिव सीमित संसाधनों और बढ़ते कार्यभार के बावजूद शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहे हैं।
उनसे मूल पंचायत कार्यों के अलावा राजस्व विभाग के कार्य भी कराए जा रहे हैं, जबकि उनकी वर्षों से लंबित मांगों पर आदेश जारी नहीं हो रहे हैं।
प्रमुख 17 मांगें इस प्रकार हैं –
1. पंचायत सचिव संवर्ग का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संविलियन कर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
2. स्वामित्व योजना, eKYC, अधिकार अभिलेख, पंजीयन जैसे समस्त राजस्व प्रकृति के कार्यों से मुक्त किया जाए।
3. 3 अगस्त 2023 को लाल परेड ग्राउंड भोपाल में हुई घोषणाओं के लंबित आदेश तत्काल जारी हों।
4. समयमान वेतनमान और वेतन विसंगति का निराकरण किया जाए।
5. PCO पद पर 50 प्रतिशत विभागीय पदोन्नति कोटा लागू किया जाए।
6. 300 दिवस अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ दिया जाए।
7. सचिव और उनके परिवार को कैशलेस स्वास्थ्य बीमा / आयुष्मान योजना में शामिल किया जाए।
8. मनरेगा के अपूर्ण कार्यों में बिना भौतिक सत्यापन के सचिवों से हो रही वसूली पर रोक लगे।
9. नियुक्ति दिनांक से सेवाकाल की गणना कर पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।
10. दिवंगत सचिवों के OBC वर्ग के अनुकंपा आश्रितों को शीघ्र नियुक्ति दी जाए।
11. अनुकंपा नियुक्ति में CPCT की अनिवार्यता में 2 वर्ष की छूट दी जाए।
12. सेवानिवृत्त सचिवों की लंबित ग्रेच्युटी और NPS राशि का तत्काल भुगतान हो।
13. सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली राशि 3 लाख से बढ़ाकर न्यूनतम 10 लाख की जाए।
14. गैर-पंचायत अतिरिक्त कार्यों पर रोक लगाई जाए।
15. सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
16. वेतन, पदोन्नति, ट्रांसफर, पेंशन जैसी समस्याओं के लिए स्थायी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।
17. संगठन ने कहा कि ये मांगें किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि सेवा सुरक्षा और न्यायोचित अधिकारों से जुड़ी हैं।
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा










