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इंदौर हादसे के बाद जागा पीएचई विभाग; छिंदवाड़ा में आनन-फानन में कार्यशाला आयोजित

​सवालों के घेरे में विभाग: क्या 17 मौतों के बाद ही याद आती है जनता की सुरक्षा? शहर से लेकर गांव तक आज भी नलों से आ रहा ‘जहर’

​छिंदवाड़ा | दबंग इंडिया इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 17 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस बड़ी घटना के बाद अब छिंदवाड़ा का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) भी नींद से जागा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी की समस्या को देखते हुए विभाग द्वारा अब ग्राम पंचायत सचिवों और नल ऑपरेटरों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि पानी की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।

​इसी कड़ी में आज छिंदवाड़ा जनपद पंचायत में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें पानी को संक्रमण से बचाने के गुर सिखाए गए। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार था?

​नल से जल या नल से बीमारी?

​नगर निगम क्षेत्र हो या सुदूर ग्रामीण अंचल, आज भी कई बस्तियों में नलों से मटमैला और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इसकी शिकायत कर रहे हैं, लेकिन इंदौर कांड से पहले विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि ‘हर घर जल’ मिशन के तहत हर नागरिक को शुद्ध पेयजल मिले, लेकिन धरातल पर छिंदवाड़ा में स्थितियां इसके उलट नजर आ रही हैं।

​जल जीवन मिशन की सुस्त चाल, अधर में काम

​खबर यह भी है कि जिले में कई स्थानों पर जल जीवन मिशन का काम कछुआ गति से चल रहा है। कई गांवों में पाइपलाइन डालकर छोड़ दी गई है, तो कहीं निर्माण कार्य महीनों से अधूरा पड़ा है। कुछ ही महीनों में भीषण गर्मी का दौर शुरू होने वाला है, जिससे जिले में जल संकट गहराने की पूरी आशंका है। अधूरे निर्माण कार्यों के कारण ग्रामीणों को आने वाले समय में बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है।
छिंदवाड़ा दबंग इंडिया कन्हैया विश्वकर्मा